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लांस नायक नज़ीर अहमद वानी ‘अशोक चक्र’ पाने वाले पहले कश्मीरी बने

भारत के 70वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर 26 जनवरी, 2019 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शहीद लांस नायक नज़ीर अहमद वानी को मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया। शहीद की ओर से यह सम्मान उनकी पत्नी ने लिया। इस दौरान उनकी मां भी वहां मौजूद रहीं। नज़ीर अहमद वानी यह सम्मान पाने वाले पहले कश्मीरी हैं। कभी स्वयं आतंकी रहे लांस नायक नज़ीर अहमद वानी जम्मू-कश्मीर में एक आतंकरोधी ऑपरेशन के दौरान शहीद हो गए थे।

आतंकवाद से ‘अशोक चक्र’ तक का सफ़र:

शहीद लांस नायक नज़ीर अहमद वानी पहले स्वयं एक आतंकी थे। बाद में आतंकवाद का रास्ता छोड़ने के बाद वर्ष 2004 में ये सेना शामिल हुए। ये 2004 में 162वीं इन्फेंट्री बटालियन (टेरिटोरियल आर्मी) में भर्ती हुए थे। सेना में भर्ती के बाद इन्होंने अधिकतर समय कश्मीर में ही ड्यूटी की जिस दौरान ये आतंकियों के ख़िलाफ़ चलाये गये कई अभियानों में शामिल रहे। नवंबर 2018 में आतंकवाद रोधी अभियान के दौरान शोपियां में एक मुठभेड़ में इन्होंने दो आतंकी मार गिराए। तभी अपने एक घायल साथी की मदद करने के दौरान सर में गोली लगने से ये शहीद हो गए। देश के लिए अपनी जान कुर्बान करने वाले लांस नायक नज़ीर अहमद वानी को अशोक चक्र प्रदान किया गया।

शहीद लांस नायक नज़ीर अहमद वानी:

• शहीद वानी अशोक चक्र सम्मान पाने वाले पहले कश्मीरी हैं।
• 38 वर्षीय नज़ीर अहमद वानी जम्मू-कश्मीर की कुलगाम तहसील के अश्मूजी गांव के रहने वाले थे।
• ये पहले एक आतंकी थे और बाद में सेना में भर्ती हुए।
• वानी ने 2004 में सेना की 162वीं इन्फेंट्री बटालियन (टेरिटोरियल आर्मी) से अपने सैन्य करियर की शुरुआत की थी।
• वानी को आतंकवादियों से लड़ने में उनके अदम्य साहस के लिए 2007 और 2018 में सेना पदक से भी सम्मानित किया जा चुका है।
• नवंबर 2018 में आतंकियों के ख़िलाफ़ अपने आदमी साहस का परिचय देते हुए लांस नायक नज़ीर अहमद वानी वीरगति को प्राप्त हो गए।
• शहीद वानी को उनके पैतृक गांव में नम आँखों से विदाई देते हुए 21 तोपों की सलामी के साथ सुपुर्द-ए-ख़ाक किया गया था।
• इनके परिवार में पत्नी महजबीं और दो बेटे अतहर और शाहिद हैं।

विदित हो कि 34 राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात वानी 23 नवंबर, 2018 को जब अपने साथियों के साथ गश्त पर थे, तो इन्हें ख़ुफ़िया विभाग से शोपियां के बटागुड गांव में हिज्बुल और लश्कर के 6 आतंकियों के छिपे होने की सूचना मिली। आतंकियों के पास भारी तादाद में हथियार थे। वानी और उनकी टीम को आतंकियों के भागने का रास्ता रोकने की ज़िम्मेदारी दी गई। वानी अपनी टीम के साथ बटागुड गांव पहुंचे जहाँ आतंकियों ने अचानक सुरक्षाबलों पर फायरिंग कर दी। एनकाउंटर में वानी और उनके साथियों ने सभी 6 आतंकियों को मार गिराया। वानी ज़ख़्मी होने के बाद भी आतंकियों के सामने टिके रहे और उन्होंने ख़ुद दो आतंकियों को मारा। इस दौरान अपने एक घायल साथी की मदद करते हुए अचानक एक गोली उनके सिर में आ लगी जिससे लांस नायक नज़ीर अहमद वानी शहीद हो गए।

अशोक चक्र:

अशोक चक्र शांति काल के दौरान प्रदान किया जाने वाला भारत का सर्वोच्च वीरता पुरस्कार है। यह सम्मान सैनिकों और असैनिकों को उनके द्वारा प्रदर्शित असाधारण वीरता, शूरता व बलिदान के लिए दिया जाता है। यह सम्मान भारत के राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किया जाता है। वर्ष 2018 में यह सम्मान भारतीय वायु सेना के कॉरपोरल ज्योति प्रकाश निराला को मरणोपरांत प्रदान किया गया था।

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