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“ग्लोबल हाउसिंग टेक्नॉलजी चैलेंज-इंडिया” का शुभारंभ

आवास और शहरी मामलों के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हरदीप पुरी ने “प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी पीएमएवाई” (यू) के अंतर्गत बड़े पैमाने पर निर्माण को विश्वभर में उपलब्ध बेहतरीन निर्माण प्रौद्योगिकियों को प्राप्त् करने के एक अवसर के रूप में इस्तेमाल करते हुए प्रौद्योगिकी हस्तांरतरण में महत्वपूर्ण परिवर्तन लाने का आह्वान करते हुए ‘ग्लोबल हाउसिंग टेक्नॉलजी चैलेंज- इंडिया’ (जीएचटीसी-इंडिया) का शुभारंभ किया।
इस अवसर पर नीति आयोग के मुख्यं कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत, सचिव- आवास और शहरी मामलों का मंत्रालय दुर्गा शंकर मिश्र, संयुक्त् सचिव एवं मिशन निदेशक (एचएफए)- आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय अमृत अभिजात, मंत्रालय के वरिष्ठप अधिकारी तथा निर्माण उद्योग के विविध हितधारक मौजूद थे।

‘ग्लोबल हाउसिंग टेक्नॉलजी चैलेंज- इंडिया’ (जीएचटीसी-इंडिया):

• जीएचटीसी-इंडिया के तीन संघटक – i) ग्रैंड एक्स्पो-कम-कॉन्फ्रेंस का संचालन करना, ii) दुनियाभर की प्रमाणित प्रदर्शनीय प्रौद्योगिकियों की पहचान करना; iii) चुनिंदा आईआईटी में इन्कूबेशन सेंटर्स की स्थापना तथा आशा इंडिया कार्यक्रम के द्वारा सम्भावित प्रौद्योगिकियों को प्रोत्साहन देना हैं।

• इसका उद्देश्य एक चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया के माध्यम से वैश्विक स्तर पर उपलब्ध नवोन्मेषी निर्माण प्रौद्योगिकियां प्राप्ता करना तथा देश में अनुसंधान एवं विकास के लिए उपयुक्त वातावरण तैयार करने के लिए भावी प्रौद्योगिकियों को भी बढ़ावा देना है।

• यह सतत तरीके से कम लागत और अच्छी गुणवत्ता वाले निर्माण सहित अल्पावधि में रहने को तैयार आवास उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयासरत है।

• जीएचटीसी-इंडिया की संकल्पना देश में निर्माण क्षेत्र में आवश्यक महत्वपूर्ण बदलावों को समर्थ बनाने के लिए की गई है।

इस अवसर पर आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय में सचिव दुर्गा शंकर मिश्र ने कहा कि आवास और शहरी मामलों का मंत्रालय, वर्ष 2022 तक सभी पात्र लाभार्थियों को हर मौसम के लिए अनुकूल ‘पक्के मकान’ उपलब्ध कराने हेतु प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी (पीएमएवाई यू) मिशन का कार्यान्वयन कर रहा है। वर्ष 2022 तक लगभग एक करोड़ मकानों का निर्माण करने की विधिमान्य मांग के विपरीत आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा अब तक लगभग 70 लाख मकानों को मंजूरी दी गई है, जिनमें से लगभग 37 लाख स्थापित हो चुके हैं और लगभग 15 लाख मकानों का निर्माण पूरा करके लाभार्थियों को उनका आवंटन किया जा चुका है।

सुदृढ़ प्रकिया सुनिश्चित करने के लिए आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने किफायती मकानों के निर्माण हेतु नवोन्मेषी और वैकल्पिक निर्माण प्रौद्योगिकियों को धीमे और सीमित रूप से अपनाने के व्यापक कारणों की पहचान करने हेतु राज्यों/संघ शासित प्रदेशों की सरकारों, आईआईटी, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं और अन्य हितधारकों के साथ विचार-विमर्शों का आयोजन किया।

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