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07 मई को मनाया गया ‘विश्व अस्थमा दिवस’

वर्ष 2019 का ‘विश्व अस्थमा दिवस’ (World Asthma Day) 07 मई, 2019 को विश्वभर में मनाया गया। यह दिवस प्रत्येक वर्ष के मई महीने के पहले मंगलवार को मनाया जाता है। इस बार विश्व अस्थमा दिवस का विषय ‘स्टॉप फॉर अस्थमा’ (STOP for Asthma) रखा गया था।

इस वर्ष के विश्व अस्थमा दिवस का विषय STOP for Asthma केवल एक शब्‍द ना होकर एक विस्‍तृत अभियान है, जहां ‘STOP’ का अर्थ है-

  • S Symptoms Evaluation (लक्षणों का मूल्यांकन) ।
  • T Test Response (परीक्षण पर प्रतिक्रिया) ।
  • O – Observe and Assess (निगरानी और मूल्यांकन) ।
  • P – Proceed to adjust treatment (इलाज के तौर-तरीके समायोजित करना)

उद्देश्य:
विश्व अस्थमा (दमा) दिवस का उद्देश्य अस्थमा अथवा दमा और इसके इलाज के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य विश्वभर के लोगों को अस्थमा बीमारी के बारे में जागरूक करना है।

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अस्थमा (Asthma) क्या है?

  • अस्थमा (दमा) श्वसन सम्बन्धी रोग है, और यह सभी आयुवर्ग के लोगों को प्रभावित कर सकता है। यह बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है लेकिन हाल के वर्षों में इस बीमारी का प्रसार बच्चों में लगातार बढ़ता देखा जा रहा है।
  • अस्थमा अनुवांशिक भी हो सकता है और पर्यावरण के कारण भी।
  • अस्थमा के मरीज़ों को हर मौसम में अतिरिक्त सुरक्षा की आवश्यकता होती है। हालाँकि इससे पीड़ित लोगों मरीज़ों के लिए आहार की कोई बाध्यता नहीं होती, लेकिन अगर उन्हें किसी विशेष प्रकार के आहार से एलर्जी हो तो उससे परहेज़ करना चाहिए। यह बीमारी श्वसन मार्ग में सूजन के कारण होती है।
  • अस्थमा पीड़ितों को आजीवन कुछ सावधानियां अपनानी पड़ती हैं। इन्हें
  • अस्थमा के मरीज़ को सांस लेने में परेशानी होती है। खांसी आती है और इनका सांस बहुत जल्दी फूल जाता है।
  • यद्यपि अस्थमा का कोई स्थायी इलाज नहीं है, परन्तु इसके विभिन्न तरीकों द्वारा इसे नियंत्रित किया जा सकता है।



ग़ौरतलब है कि वर्तमान समय में वायु प्रदूषण को देखते हुए अस्थमा के रोगियों की संख्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है। एक अनुमान के मुताबिक, भारत में अस्थमा के रोगियों की संख्या क़रीब 15 से 20 करोड़ है जिसमें लगभग 12 फ़ीसदी बच्चे अस्थमा से पीड़ित हैं। लांसेट द्वारा किये गये अध्ययन के अनुसार 2015 में ट्रैफिक से सम्बंधित प्रदूषण के कारण भारत में साढ़े तीन लाख बच्चे अस्थमा से पीड़ित थे। इस मामले में भारत चीन के बाद दूसरे स्थान पर था। 2015 में दुनियाभर में अस्थमा के कारण क़रीब 4 लाख लोगों की मौत हुई।

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विश्व अस्थमा दिवस:
यह दिवस प्रत्येक वर्ष मई महीने के पहले मंगलवार को मनाया जाता है। सर्वप्रथम विश्व अस्थमा दिवस का आयोजन 1998 में बार्सिलोना, स्पेन सहित 35 देशों में किया गया था। इसका आयोजन ग्लोबल इनिशिएटिव फॉर अस्थमा (जीआईएनए) द्वारा किया जाता है। जीआईएनए अस्थमा के प्रसार, रुग्णता एवं मृत्यु दर को कम करने के लिए विश्व भर के स्वास्थ्य पेशेवरों और सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ काम करता है। इसकी शुरुआत 1993 में राष्ट्रीय हृदय, फेफड़े और रक्त संस्थान, राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान, संयुक्त राज्य अमेरिका एवं विश्व स्वास्थ्य संगठन के सहयोग से की गई थी।







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