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भारत में पुरुषों में Anaemia की स्थिति: Lancet Global Health

Anaemia Among Men in India : Lancet Global Health

द लांसेट ग्लोबल हेल्थ (The Lancet Global Health) में हाल ही में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया है कि भारत में 23.5% पुरुष (15-54 वर्ष आयु वर्ग) अरक्तता (Anemia) से प्रभावित हैं।

 

 

मुख्य बिंदु

  • अध्ययन के तहत एनीमिया (Anemia) के प्रसार को हल्के (Mild) 18%, मध्यम (moderate) 5% और गंभीर (severe) 0.5% के मानदंड पर निर्धारित किया गया है।  
  • इसके मुताबिक़, 2013 में विश्व के अनुमानतः 1.9 बिलियन लोगों (27%) को एनीमिया था और जिनमें से 93% मामले निम्न और मध्यम आय वाले देशों में होते हैं।
  • भारत में एनीमिया पर जनसंख्या आधारित अध्ययनों में अधिकतर महिलाओं और बच्चों पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जबकि एनीमिया से पीड़ित पुरुषों पर, उनके  स्वास्थ्य और आर्थिक उत्पादकता पर इसके प्रतिकूल प्रभाव के बावजूद, बहुत कम ध्यान दिया गया है।
  • यद्यपि भारत में पुरुषों और महिलाओं के लिए एनीमिया के भौगोलिक और सामाजिक प्रतिमान समान हैं।
  • पुरुषों के बीच एनीमिया की व्यापकता राज्यों के आधार पर अलग-अलग है जैसे – मणिपुर में 9% (सबसे कम), बिहार में 33% (उच्चतम)।

  • शिक्षा का न्यून स्तर, कम घरेलू संपत्ति वाले और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले पुरुषों में एनीमिया होने की संभावना अधिक होती है।
  • युवा आयु वर्ग के बीच एनीमिया का उच्च प्रसार देखा गया है जबकि इसका सबसे कम प्रचलन 50-54 वर्ष की आयु समूह में देखा गया है।
  • धूम्रपान रहित तंबाकू का सेवन, कम वज़न, शहरीकरण का स्तर और पारिवारिक आय जैसे कारक इस बीमारी के विकास की उच्च संभावना से जुड़े हैं।

 

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पुरुषों पर एनीमिया (Anemia) का प्रभाव और उसका निवारण
यद्यपि पुरुषों में एनीमिया (Anemia in Male) कुपोषण के अंतरजनपदीय चक्र को प्रभावित नहीं करता है, लेकिन फिर भी यह उनमें समग्र कार्य प्रदर्शन और जीवन की गुणवत्ता को कम कर सकता है। यह उनमें थकान और सुस्ती पैदा कर उनकी उत्पादकता को कम कर सकता है, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई उत्पन्न कर सकता है।

इसके निवारण के लिए आवश्यक है कि एनीमिया और विभिन्न पोषण संबंधी कमियों के बारे में उच्च जागरूकता लायी जाये। इसके अलावा आयरन की गोलियों और खाद्य पदार्थों में लौह की मात्रा के सुदृढ़ीकरण पर ध्यान दिया जाये।

 

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नीमिया (Anemia) क्या है ?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ)  “एनीमिया एक ऐसी स्थिति है जिसमें शारीरिक ,ज़रूरतों को पूरा करने के लिए लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या या उनकी ऑक्सीजन-वहन क्षमता अपर्याप्त है”।

 

एनीमिया  (Anemia) के कारण
हालांकि आयरन की कमी एनीमिया का सबसे आम कारण है, लेकिन अन्य स्थितियां, जैसे कि फोलेट, विटामिन बी 12 और विटामिन ए की कमी, पुरानी सूजन, परजीवी संक्रमण और विरासत में मिला कोई विकार आदि, सभी एनीमिया का कारण बन सकते हैं। थकान, कमज़ोरी, चक्कर आना और उनींदापन आदि इसके गंभीर लक्षणों में से हैं। गर्भवती महिलाएं और बच्चे विशेष रूप से कमज़ोर होते हैं। माना जाता है कि 20-34 वर्ष के समूह के पुरुषों में एनीमिया होने की संभावना सबसे कम होती है।

 

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राष्ट्रीय आयरन प्लस पहल (National Iron Plus Initiative – NIPI)
एनीमिया की गिरावट की वार्षिक दर में एक से तीन प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी करने के उद्देश्य से भारत सरकार ने 2018 में, गहन राष्ट्रीय आयरन प्लस पहल (NIPI) कार्यक्रम के हिस्से के रूप में एनीमिया मुक्त भारत (Anemia Mukt Bharat – AMB) का शुभारंभ किया, जिसके तहत 6-59 महीने, 5-9 वर्ष के बच्चे, किशोर लड़कियां और लड़के (10-19 वर्ष), प्रजनन आयु की महिला (15-49 वर्ष), गर्भवती महिलाएं और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को लक्ष्य किया गया।  

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